मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना के लिए 'फुल स्पैन बॉक्स गर्डर्स': तेज़ गति से निर्माण के क्षेत्र में एक क्रांति
श्री प्रदीप अहिरकर, कार्यकारी निदेशक (ट्रैक एवं डिज़ाइन) द्वारा प्रकाशन: जर्नल ऑफ सिविल इंजीनियरिंग एंड आर्किटेक्चर, मई 2025 अंक
सारांश
एमएएचएसआर (मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल) कॉरिडोर देश की पहली हाई स्पीड रेल (HSR) परियोजना के सपने को साकार करने वाला एक महत्वपूर्ण उपक्रम है और यह भारत के आधारभूत संरचना विकास की दिशा में एक प्रमुख मील का पत्थर सिद्ध होगा। विश्व स्तर पर 20 से अधिक देशों में हाई स्पीड रेल का व्यावसायिक संचालन हो रहा है, जिनमें जापान अपनी शिंकान्सेन (Shinkansen) प्रौद्योगिकी के साथ अग्रणी देशों में शामिल है। शिंकान्सेन ने अपने 60 वर्षों से अधिक के संचालन काल में यात्री मृत्यु से संबंधित शून्य दुर्घटना का उत्कृष्ट रिकॉर्ड बनाए रखा है तथा समयपालन (Punctuality) के मामले में भी इसकी उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। इसी तकनीकी श्रेष्ठता के कारण एमएएचएसआर परियोजना के लिए शिंकान्सेन प्रौद्योगिकी का चयन किया गया है।
जहाँ तक अधोसंरचना (Superstructure) के लिए गर्डर निर्माण का प्रश्न है, इसके लिए अनेक विधियाँ उपलब्ध हैं, जैसे सेगमेंट बाय सेगमेंट (SBS) गर्डर, फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड (FSLM), स्टील गर्डर, आई-गर्डर तथा यू-गर्डर, जिनमें FSLM और SBS प्रमुख विधियाँ हैं। FSLM में गर्डर की कास्टिंग तथा स्थापना (Erection) एक ही बार में 35/40 मीटर के पूर्ण स्पैन के रूप में की जाती है, जबकि SBS पद्धति में 2 से 2.5 मीटर के छोटे-छोटे खंडों (Segments) की कास्टिंग कर उन्हें क्रमशः जोड़कर स्थापित किया जाता है।
विश्वभर की अधिकांश हाई स्पीड रेल परियोजनाओं में वायाडक्ट निर्माण हेतु गर्डर लॉन्चिंग का कार्य सेगमेंट बाय सेगमेंट पद्धति से किया गया है। किंतु इस पद्धति में अधिक समय लगने के कारण तथा गुणवत्ता में सुधार और तकनीकी नवाचारों को अपनाने की आवश्यकता को देखते हुए एक अधिक प्रभावी समाधान की आवश्यकता महसूस की गई। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड (FSLM) को एक उन्नत एवं उपयुक्त समाधान के रूप में अपनाने की योजना बनाई गई। वर्तमान में केवल कुछ ही देशों, जैसे चीन और ताइवान, ने अपनी हाई स्पीड रेल परियोजनाओं में इस तकनीक का सीमित स्तर पर उपयोग किया है।
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