पहले स्पैनर से लेकर अंतिम स्लैब ट्रैक तक, जिस पर बुलेट ट्रेन चलेगी, एमएएचएसआर को जापानी कंपनी शिनकानसेन के श्रेष्ठ मानकों को पूरा करना होगा और राष्ट्र में परिवहन प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता का नया पैमाना बनना स्थापित करना होगा। राष्ट्र का पहला एचएसआर कॉरिडोर होने के नाते, यह परियोजना प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक जनसांख्यिकी में उन्नति और बाधाओं से आगे बढ़ने की इच्छा का प्रतीक है।
भारत-जापान संबंधों से एमएएचएसआर कॉरिडोर की अवधारणा बनाने में मदद मिली है और जापानी कार्यप्रणाली एवं प्रौद्योगिकी को सीखने और अनुकूलित करने की भारतीय कार्यबल की क्षमता के आधार पर इसपर कार्य किया जा रहा है।
एनएचएसआरसीएल हमारे कर्मचारियों के लिए जापान आधारित प्रशिक्षण प्रणाली तैयार करने पर बल देता है। चूँकि हाई-स्पीड रेल प्रौद्योगिकी को जापानी शिनकानसेन ट्रेन प्रौद्योगिकी से अपनाया जा रहा है, इसलिए उपकरण, प्रौद्योगिकी, सामग्री व प्रणालियों में महारत हासिल करने से कार्यबल को आगे चलकर उच्च वैश्विक मांगों को अनुकूलित करने में मदद मिलेगी।
ये शिक्षण केवल शीर्ष स्तर के प्रबंधन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कार्यबल को प्रशिक्षित एवं कुशल भी बनाया गया है। टीओटी पहलों में भारतीय ठेकेदारों की ट्रैक निर्माण में भागीदारी के अवसर को खोलना शामिल है। इसके लिए सूरत में एक सुविधा का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें ठेकेदार के कर्मचारी जापान के विशेषज्ञों द्वारा शिनकानसेन ट्रैक प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण और प्रमाणन हासिल करेंगे। योजना के अनुसार, लगभग 1,153 कर्मियों को शिनकानसेन निर्माण प्रौद्योगिकी और ओ एंड एम प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित किया जाएगा। अनुमान के अनुसार, इस परियोजना से विकास को गति मिलेगी और निर्माण चरण के दौरान 90,000 लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं, जिसमें से रखरखाव व संचालन में 4,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और 20,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे।
इसके अलावा, एनएचएसआरसीएल वडोदरा स्थित अपने हाई-स्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एचएसआरटीआई) की मदद से एक सुविधा भी बना रहा है, जिसमें भारत में भविष्य के सभी हाई-स्पीड रेल कार्यबल को प्रशिक्षण देने की कल्पना की गई है। इस प्रशिक्षण संस्थान में रोलिंग स्टॉक, सिविल व ट्रैक रखरखाव, इलेक्ट्रिकल, सिग्नल व दूरसंचार स्टेशन और ट्रेन चालक दल सहित विभिन्न विषयों में लगभग 3500 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।