प्रकाशन तिथि: 12-03-2021
मुंबई-नागपुर हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (लगभग 736 किमी) के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए LiDAR सर्वे आज शुरू हो गया है। इस सर्वे में, अत्याधुनिक एरियल LiDAR और इमेजिंग सेंसर से लैस एक हवाई जहाज़ ने पहली उड़ान भरी और ज़मीनी सर्वे से जुड़ा डेटा इकट्ठा किया।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड 'लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग सर्वे' (LiDAR) तकनीक अपना रहा है। यह तकनीक ज़मीन से जुड़ी सभी बारीकियाँ और डेटा 3-4 महीनों में ही उपलब्ध करा देती है, जबकि आम तौर पर इस प्रक्रिया में 10-12 महीने लगते हैं।
किसी भी लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए ज़मीनी सर्वे एक बेहद ज़रूरी काम होता है, क्योंकि यह सर्वे प्रोजेक्ट के रास्ते (अलाइनमेंट) के आस-पास के इलाकों की सटीक जानकारी देता है। यह तकनीक सटीक सर्वे डेटा देने के लिए लेज़र डेटा, GPS डेटा, उड़ान से जुड़े पैरामीटर्स और असली तस्वीरों के मेल का इस्तेमाल करती है।
एरियल LiDAR सर्वे के दौरान, प्रस्तावित अलाइनमेंट के आस-पास 150 मीटर के दायरे को सर्वे के मकसद से कैप्चर किया जा रहा है।
डेटा इकट्ठा करने के बाद, प्रस्तावित अलाइनमेंट के कॉरिडोर का 1:2500 के स्केल पर एक थ्री-डाइमेंशनल (3D) टोपोग्राफिकल मैप उपलब्ध होगा। इसका इस्तेमाल वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल अलाइनमेंट, स्ट्रक्चर, स्टेशनों और डिपो की जगह, कॉरिडोर के लिए ज़रूरी ज़मीन, प्रोजेक्ट से प्रभावित प्लॉट/स्ट्रक्चर की पहचान, राइट ऑफ़ वे, वगैरह को डिज़ाइन करने के लिए किया जाएगा।
स्ट्रक्चर, पेड़ों और ज़मीन की दूसरी छोटी-छोटी चीज़ों की साफ़ तस्वीरें लेने के लिए, LiDAR सर्वे में 100-मेगापिक्सल के कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
NHSRCL को सात (7) हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया है, और सभी कॉरिडोर में ज़मीन के सर्वे के लिए LiDAR सर्वे तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
अतिरिक्त जानकारी:
मुंबई-नागपुर HSR कॉरिडोर (लगभग 736 km) की प्रस्तावित योजना मुंबई शहर को इन शहरों/कस्बों से जोड़ेगी:
- मुंबई
- नागपुर
- खापरी डिपो
- वर्धा
- पुलगांव
- करंजा लाड
- मालेगांव जहांगीर
- मेहकर
- जालना
- औरंगाबाद
- शिरडी
- नासिक
- इगतपुरी
- शाहपुर