प्रकाशन तिथि: 02-04-2026
भारत के पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में 21 किलोमीटर लंबी एक सुरंग शामिल है। इस सुरंग का पाँच किलोमीटर हिस्सा, जिसे 'न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड' (NATM) का इस्तेमाल करके बनाया गया है, पूरी तरह से खोद लिया गया है।
खुदाई का काम पूरा होने के साथ ही, अब सुरंग निर्माण का काम अगले चरणों में पहुँच गया है।
सुरंग के अंदर, एक 'ड्रेनेज कास्टिंग गैन्ट्री' का इस्तेमाल करके जल निकासी प्रणाली (drainage system) बनाई जा रही है — जिससे यह सुनिश्चित होता है कि रिसने वाला सारा पानी सुरक्षित रूप से इकट्ठा हो जाए और सुरंग के लिए बनी एक विशेष जल निकासी प्रणाली के ज़रिए बाहर निकाल दिया जाए।
इसके बाद, 'वॉटरप्रूफिंग गैन्ट्री' विशेष झिल्लियाँ (membranes) लगाती हैं, जिससे एक सुरक्षात्मक कवच बन जाता है जो सुरंग को पानी के रिसाव से बचाता है।
सुरंग के आकार के अनुसार 'रीइन्फोर्समेंट बार केज' (सरियों के पिंजरे) तैयार करके लगाए जा रहे हैं; ये स्टील का एक ढाँचा बनाते हैं जो कंक्रीट की अंतिम परत को मज़बूती देता है।
इसके बाद 'लाइनिंग गैन्ट्री' आती है, जो कंक्रीट की अंतिम परत डालती है; यही परत सुरंग को उसकी स्थायी ढाँचागत मज़बूती और चिकनी फिनिश देती है।
सुरंग के संचालन और रखरखाव के लिए ज़रूरी महत्वपूर्ण प्रणालियों को रखने के लिए विशेष उपकरण कक्ष (equipment rooms) भी बनाए जा रहे हैं।
हर चरण के लगातार आगे बढ़ने के साथ ही, भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का भूमिगत हिस्सा पूरा होने के और करीब पहुँच रहा है।
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