प्रकाशन तिथि: 03-02-2026
माउंटेन टनल (MT-6) की लंबाई 454 मीटर और चौड़ाई 14.4 मीटर है
पालघर में लगभग एक महीने के भीतर दो माउंटेन टनल ब्रेकथ्रू हासिल
रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव ने बुलेट ट्रेन परियोजना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा की। महाराष्ट्र के पालघर में दूसरी माउंटेन टनल का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। यह टनल 454 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है, जिसमें मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अप और डाउन दोनों ट्रैक होंगे।
यह पालघर जिले में एक महीने के भीतर दूसरी माउंटेन टनल ब्रेकथ्रू है। पहली टनल MT-5 का ब्रेकथ्रू 2 जनवरी 2026 को सापहले के पास हुआ था।
माउंटेन टनल (MT-6) का निर्माण दोनों छोर से न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग करते हुए किया गया, जो ड्रिल और नियंत्रित ब्लास्टिंग की उन्नत तकनीक है। इस टनल का निर्माण कार्य 12 महीनों में पूरा किया गया। टनल ब्रेकथ्रू वह महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग चरण होता है जब दोनों ओर से खुदाई करने वाली टीमें बीच में मिलती हैं और एक सतत मार्ग बन जाता है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पूरी हाई-स्पीड रेल टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि टीम की कार्य गति ने देश में नया आत्मविश्वास पैदा किया है। यह परियोजना नई तकनीकों और नवाचारों के कारण वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इस परियोजना में उपयोग हो रही कई उन्नत मशीनें भारत में ही निर्मित हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुजरात खंड में बुलेट ट्रेन परियोजना अगले वर्ष व्यावसायिक संचालन शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि 2028 तक यह सेवा ठाणे तक और 2029 तक मुंबई तक विस्तारित होने की उम्मीद है।
पालघर लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. हेमंत विष्णु सवरा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया और बताया कि पालघर जिले में रेलवे परियोजनाओं के माध्यम से तेजी से विकास हो रहा है। इसमें हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) और प्रस्तावित वधवन पोर्ट शामिल हैं।
न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों में विशेष रूप से उपयोगी है। इसमें भारी मशीनों की आवश्यकता कम होती है और शॉटक्रीट, रॉक बोल्ट और लैटिस गर्डर्स के माध्यम से रियल-टाइम अनुकूलन संभव होता है।
टनल के अंदर श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न जियोटेक्निकल उपकरण, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, अग्नि सुरक्षा उपाय, उचित वेंटिलेशन और नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था लागू की गई।
महाराष्ट्र में परियोजना का कार्य कई मोर्चों पर तेजी से प्रगति कर रहा है। वैतरणा नदी पर सबसे लंबा पुल पियर स्तर तक पहुंच चुका है, जबकि उल्हास और जगनी नदियों पर कार्य प्रगति पर है। चारों स्टेशनों पर निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और 21 किमी लंबी टनल (बीकेसी से शिलफाटा) पर भी कार्य जारी है। पालघर जिले में कुल 7 माउंटेन टनल निर्माणाधीन हैं।
| क्रम संख्या |
माउंटेन टनल संख्या |
लंबाई (किमी) |
% पूर्णता |
टिप्पणी |
| 1 |
MT-1 |
0.820 |
16% |
|
| 2 |
MT-2 |
0.228 |
|
प्रारंभिक कार्य जारी है |
| 3 |
MT-3 |
1.403 |
41% |
|
| 4 |
MT-4 |
1.260 |
32% |
|
| 5 |
MT-5 |
1.480 |
57% |
ब्रेकथ्रू 02 जनवरी 2026 को प्राप्त |
| 6 |
MT-6 |
0.454 |
47% |
आज ब्रेकथ्रू प्राप्त |
| 7 |
MT-7 |
0.417 |
29% |
|
एमएएचएसआर परियोजना लगभग 508 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 352 किमी गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में तथा 156 किमी महाराष्ट्र में है। यह परियोजना आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी, ज्ञान हस्तांतरण को प्रोत्साहित करेगी और नए औद्योगिक एवं आईटी हब के विकास में सहायक होगी।
27 जनवरी 2026 तक, लगभग 334 किमी वायाडक्ट, 17 नदी पुल और 12 प्रमुख क्रॉसिंग (राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे आदि पर) पूर्ण हो चुके हैं। गुजरात खंड में ट्रैक बिछाने और विद्युतीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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