भारत में पहली बार: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में ‘भूकंप की जल्द पहचान करने वाली प्रणाली’ के लिए 28 सीस्मोमीटर
प्रकाशन तिथि: 29-01-2024

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट (मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर) के लिए 28 भूकंपमापी (seismometers) लगाए जाएंगे, ताकि भूकंप के दौरान यात्रियों और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पक्की की जा सके।

जापानी शिंकनसेन टेक्नोलॉजी पर आधारित यह 'भूकंप की पहले से जानकारी देने वाला सिस्टम' (Early Earthquake Detection System), प्राइमरी तरंगों के ज़रिए भूकंप से होने वाले झटकों का पता लगाएगा और बिजली को अपने आप बंद कर देगा। जब बिजली बंद होने का पता चलेगा, तो इमरजेंसी ब्रेक चालू हो जाएंगे और प्रभावित इलाके में चल रही ट्रेनें रुक जाएंगी।

इन 28 भूकंपमापियों में से 22 को रेल लाइन के रास्ते में लगाया जाएगा। इनमें से आठ महाराष्ट्र में—मुंबई, ठाणे, विरार और बोईसर में—और चौदह गुजरात में—वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, महेमदाबाद और अहमदाबाद में—लगाए जाएंगे। भूकंपमापियों को रेल लाइन के रास्ते में पड़ने वाले ट्रैक्शन सब-स्टेशनों और स्विचिंग पोस्ट पर लगाया जाएगा।

बाकी बचे छह भूकंपमापियों (जिन्हें 'इनलैंड भूकंपमापी' कहा जाता है) को भूकंप की ज़्यादा संभावना वाले इलाकों में लगाया जाएगा—महाराष्ट्र में खेड़, रत्नागिरी, लातूर और पांगरी में, और गुजरात में अदेसर और पुराने भुज में। MAHSR रेल लाइन के आस-पास के जिन इलाकों में पिछले 100 सालों में 5.5 से ज़्यादा तीव्रता वाले भूकंप आए हैं, उन इलाकों का सर्वे जापानी विशेषज्ञों ने किया था। एक विस्तृत सर्वे और 'माइक्रो ट्रेमर टेस्ट' के ज़रिए मिट्टी की उपयुक्तता की जाँच करने के बाद, ऊपर बताए गए इन स्थानों को चुना गया।


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भारत में पहली बार: बुलेट ट्रेन परियोजना में प्रारंभिक भूकंप पहचान प्रणाली हेतु 28 सिस्मोमीटर

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