प्रकाशन तिथि: 01-05-2023
मुंबई-अहमदाबाद HSR कॉरिडोर (MAHSR) के लिए हाई-स्पीड रेल ट्रैक सिस्टम हेतु भारतीय इंजीनियरों और वर्क लीडर्स का प्रशिक्षण शुरू हो गया है; यह प्रशिक्षण T-2 पैकेज (जो वापी और वडोदरा के बीच 237 किमी के क्षेत्र को कवर करता है) के लिए है।
यह परिकल्पना की गई है कि ट्रैक निर्माण कार्यों के लिए साइट पर केवल प्रशिक्षित और प्रमाणित इंजीनियर/वर्क लीडर ही काम करेंगे। इससे जापानी HSR ट्रैक सिस्टम की 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण' (Transfer of Technology) प्रक्रिया में भी मदद मिलेगी।
जापानी शिंकनसेन HSR में उपयोग किया जाने वाला 'बैलास्ट-लेस स्लैब ट्रैक सिस्टम' (जिसे आमतौर पर 'J स्लैब ट्रैक सिस्टम' के नाम से जाना जाता है) भारत के पहले HSR प्रोजेक्ट के लिए उपयोग किया जाएगा। यह प्रशिक्षण JARTS (जापान का एक गैर-लाभकारी संगठन) द्वारा प्रदान किया जाएगा, जिसे JICA (MAHSR प्रोजेक्ट की वित्तपोषक एजेंसी) द्वारा नामित किया गया है; यह प्रशिक्षण संबंधित क्षेत्र के जापानी विशेषज्ञों के माध्यम से दिया जाएगा।
इसमें 15 अलग-अलग पाठ्यक्रम होंगे जो ट्रैक कार्य के सभी पहलुओं को कवर करेंगे। इनमें साइट प्रबंधकों के लिए प्रशिक्षण, ट्रैक स्लैब निर्माण, RC ट्रैक बेड निर्माण, संदर्भ पिन सर्वेक्षण और डेटा विश्लेषण, स्लैब ट्रैक स्थापना, CAM स्थापना, रेल वेल्ड फिनिशिंग, रेलों की एनक्लोज्ड आर्क वेल्डिंग और टर्नआउट स्थापना शामिल हैं।
लगभग 1000 इंजीनियरों/वर्क लीडर्स/तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने की योजना है। इसके लिए सूरत डिपो में विशेष रूप से 3 (तीन) ट्रायल लाइनों वाली एक प्रशिक्षण सुविधा तैयार की गई है।
जापानी ट्रैक सिस्टम दुनिया में अद्वितीय है और इसे बिछाने के लिए बहुत उच्च स्तर के कौशल की आवश्यकता होती है। ट्रैक HSR सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण घटक है और इसे बहुत उच्च स्तर की सटीकता के साथ बिछाया जाना आवश्यक है। 20 (बीस) जापानी विशेषज्ञ भारतीय इंजीनियरों, पर्यवेक्षकों और तकनीशियनों को गहन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे और उनके कौशल को प्रमाणित करेंगे।
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